भगवान गणेश की कई रोचक और प्रेरणादायक कथाएँ भारतीय पौराणिक ग्रंथों में पाई जाती हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्ध कहानी उनकी उत्पत्ति और उनके सिर की कहानी है। आइए, इसे विस्तार से जानते हैं:Dharm Gyanarth
गणेशजी की उत्पत्ति और उनके हाथी के सिर की कहानी
पुराणों के अनुसार, एक बार देवी पार्वती ने स्नान करने का निश्चय किया। स्नान के दौरान किसी के भी आने से रोकने के लिए उन्होंने हल्दी के लेप से एक बालक का निर्माण किया और उसमें प्राण डाल दिए। यह बालक गणेश थे। उन्होंने गणेश को आदेश दिया कि जब तक वह स्नान कर रही हैं, किसी को भी अंदर आने न दिया जाए।
कुछ समय बाद भगवान शिव वहां आए और अंदर जाने की कोशिश की। लेकिन गणेश ने उन्हें रोक दिया, क्योंकि वे अपनी माता के आदेश का पालन कर रहे थे। शिव ने अपने पुत्र को नहीं पहचाना और इस रोक से क्रोधित हो गए। दोनों के बीच लड़ाई छिड़ गई, और भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से गणेश का सिर काट दिया।
जब देवी पार्वती को इस घटना का पता चला, तो वे बहुत क्रोधित और दुखी हुईं। उन्होंने शिव से अपने पुत्र को पुनः जीवित करने की मांग की। शिव ने तुरंत अपने गणों को आदेश दिया कि वे किसी भी प्राणी का सिर लेकर आएं जो उत्तर दिशा में मुंह किए हुए हो। गण शिव के आदेश का पालन करते हुए एक हाथी का सिर लेकर आए।
भगवान शिव ने हाथी का सिर गणेश के शरीर से जोड़ दिया और उन्हें पुनः जीवित कर दिया। इस तरह गणेश को नया जीवन मिला। शिव ने गणेश को आशीर्वाद दिया और कहा कि वे प्रथम पूज्य होंगे। हर शुभ कार्य की शुरुआत गणेश की पूजा से होगी।
शिक्षा
इस कहानी से हमें आज्ञा पालन, कर्तव्यनिष्ठा और माता-पिता के प्रति श्रद्धा का महत्व समझने को मिलता है। साथ ही यह भी कि हर कार्य की शुरुआत विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा से करनी चाहिए।
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